बिग ब्रेकिंग: रांची के बड़े अस्पताल मरीजों को नहीं देते शुद्ध ऑक्सीजन, हो सकता है केस दर्ज

2016_12largeimg28_dec_2016_082004547रांची: रांची के बड़े अस्पताल मरीजों को शुद्ध ऑक्सीजन नहीं देते. आैषधि निरीक्षकों की तीन सदस्यीय टीम ने पिछले दिनों  जांच के दौरान गड़बड़ियां पकड़ी है. टीम ने मरीजों को दी जानेवाली ऑक्सीजन में मानकों का ख्याल नहीं रखने को लेकर रांची के अब्दुर्रज्जाक अंसारी  मेमोरियल वीवर्स अस्पताल, आर्किड मेडिकल सेंटर, गुरुनानक, रानी अस्पताल, राज अस्पताल व हेल्थ प्वाइंट हॉस्पिटल के  खिलाफ अभियोजन दायर करने की अनुमति मांगी है. टीम ने इसके अलावा मेडिकल ऑक्सीजन बनानेवाली कंपनी सैमिड हेल्थ केयर(गौतम ग्रीन सिटी रांची), पैक्स एयर इंडिया (साक्ची जमशेदपुर) व लिंडे इंडिया (जमशेदुपर) पर केस करने की अनुमति मांगी है.

जांच टीम के अनुसार, इन अस्पताल और कंपनियों ने औषधि व प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 व  नियमावली 1945 के शिड्यूल-एम में वर्णित प्रावधानों और नियम 71 व इसी  अधिनियम की धारा 18(बी), 18(सी), 18-बी का उल्लंघन किया है. टीम ने रिपोर्ट राज्य  औषधि निदेशालय को सौंप दी है. जांच औषधि निरीक्षक प्रणव प्रभात के नेतृत्व में गठित टीम में औषधि निरीक्षक उत्कलमणि व प्रतिभा झा शामिल थी. 
 
प्यूरिटी में अंतर : जांच के दौरान टीम ने पाया कि गुरुनानक अस्पताल, आर्किड मेडिकल सेंटर, राज अस्पताल व रानी अस्पताल में एजेंसी द्वारा निर्मित प्रेशर स्वींग एब्जार्बशन (पीएसए) जेनरेटर उपकरण के इंस्टॉलेशन से संबंधित कागजात पर ऑक्सीजन की प्यूरिटी 98.2 प्रतिशत लिखा गया है. वहीं, पीएसए ऑक्सीजन जेनरेटर मैनुअल से संबंधित कागजात पर प्यूरिटी 90 प्रतिशत लिखा है. यह मानक इंडियन फार्माकोपिया (ऑक्सीजन कॉटेंट नॉट लेस दैन 99 परसेंट) के मानक को पूरा नहीं करता है. इससे स्पष्ट होता है कि अस्पताल मानक का उल्लंघन कर  मरीजों को ऑक्सीजन देते हैं. 
 
किस अस्पताल में क्या मिला
 
रिम्स (30 नवंबर) :  बताया गया कि ऑक्सीजन निर्माण व आपूर्ति के लिए सैमिड हेल्थ केयर व पैक्स  एयर के साथ अनुबंध है. प्रस्तुत अभिलेख में सर्टिफिकेट ऑफ एनालाइसिस,  डिलिवरी  चालान और पास आउट डाक्यूमेंट व इनवाइस पर न तो औषधि निर्माण  अनुज्ञप्ति संख्या थी, न ही विक्रय  औषधि अनुज्ञप्ति संख्या. प्रथम दृष्टया  में यह प्रतीत होता है कि दोनों कंपनी अवैध तरीके से ऑक्सीजन का निर्माण  करती हैं.
 
क्या है नियम 
पीएसए  ऑक्सीजन जेनरेटर के इंपोर्ट से संबंधित सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल  ऑर्गेनाइजेशन, भारत सरकार के पत्रांक संख्या 29/3/2011-DC (146) में  स्पष्ट किया गया है कि ऑक्सीजन का उपयोग इलाज के रूप में किया जायेगा.  ऑक्सीजन का निर्माण ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट की धाराओं में शामिल है. औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम  1940 के  धारा 3(बी) के अनुसार मेडिकल ऑक्सीजन औषधि के अंतर्गत आता है,  इसलिए इसके  निर्माण, भंडारण, वितरण एवं विक्रय के लिए औषधि व प्रसाधन  सामग्री अधिनियम  1940 और नियमावली 1945 के तहत निर्माण व विक्रय औषधि  अनुज्ञप्ति  आवश्यक है. मेडिकल ऑक्सीजन को जीवन रक्षक दवा है,  इसलिए इसे  नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंसिलयल मेडिसिन (एनएलइएम) के अंतर्गत रखा गया  है. 
 
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी  है. रिपोर्ट का रिव्यू किया जा रहा है. पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद बुधवार  को ही कुछ कह सकता हूं. अगर अस्पताल व ऑक्सीजन निर्माण करनेवाली एजेंसी  दोषी पाये गये, तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी. 
– सुरेंद्र प्रसाद, संयुक्त निदेशक औषधि 
 
इन अस्पतालों में की गयी जांच 
गुरुनानक  अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर, आर्किड मेडिकल सेंटर,  राज अस्पताल, रानी  अस्पताल, मेदांता अब्दुर्रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल, भगवान  महावीर मेडिका सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, आलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर,  राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), हेल्थ प्वाइंट हाॅस्पिटल, सेंटेविटा अस्पताल 
 
प्रभात खबर की रिपोर्ट पर बनी थी टीम
प्रभात खबर में तीन नवंबर को इससे संबंधित खबर प्रकाशित किये जाने के बाद जांच टीम का गठन किया गया था. टीम ने अपनी रिपोर्ट 26 दिसंबर को राज्य औषधि निदेशालय को सौंपी है.
 
गुरुनानक अस्पताल (11 नवंबर) :  मेडिकल ऑक्सीजन के निर्माण व आपूर्ति से संबधित किसी भी प्रकार का कागज  प्रस्तुत नहीं किया गया. उपकरण के इंस्टालेशन सेे संबंधित अभिलेख में  ऑक्सीजन की प्यूरिटी 98.2 प्रतिशत वर्णित है. लेकिन मैनुअल अभिलेख में 90  प्रतिशत वर्णित है. इसके अलावा मेडिकल ऑक्सीजन के निर्माण व आपूर्ति की  गुणवत्ता के निर्धारण के लिए सक्षम व्यक्ति व  उपकरण नहीं मिला. औषधि  निर्माण के लिए स्थल अनुकूल नहीं पाया गया. 
 
आर्किड मेडिकल सेंटर व राज अस्पताल (12 नवंबर) : मेडिकल  ऑक्सीजन के निर्माण व आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार का कागज प्रस्तुत  नहीं किया गया. मानक, स्टोरेज, पैकेजिंग, लेबलिंग एवं स्टेंडर्ड आदि का  अनुपालन नहीं किया जाता है. अस्पताल द्वारा निर्माण की जा रही ऑक्सीजन में  कितनी मात्रा में क्या-क्या मिला है और इसमें कितनी शुद्धता है इसकी जांच  नहीं हुई है. अस्पतालों ने इससे संबंधित कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं   किया. औषधि निर्माण के लिए स्थल अनुकूल नहीं पाया गया. 
 
मेेदांता (22 नवंबर) व हेल्थ प्वाइंट (30 नवंबर) : मेदांता  ने 16 दिसंबर को बताया कि मेडिकल ऑक्सीजन का निर्माण नहीं  भंडारण किया जाता है, जबकि जांच दल ने पाया कि इसका निर्माण किया  जाता है. पर, ऑक्सीजन के निर्माण व आपूर्ति से संबंधित कागज प्रस्तुत नहीं किया गया. मानक, स्टोरेज, पैकेजिंग, लेबलिंग एवं स्टेंडर्ड आदि का अनुपालन नहीं किया जाता है. हेल्थ प्वाइंट में भी यही कमी पायी गयी. 
 
रानी अस्पताल (12 नवंबर) : मेडिकल ऑक्सीजन के निर्माण व आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार का कागज प्रस्तुत नहीं किया गया. मानक, स्टोरेज, पैकेजिंग, लेबलिंग व स्टेंडर्ड आदि का अनुपालन नहीं किया जाता है. 
 
अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का जिम्मा जिस एजेंसी को दिया गया है, वह यूएसए मान्यता प्राप्त है. हमारी ओर से कोई गड़बड़ी नहीं की गयी है.   
– डॉ राजेश कुमार, रानी अस्पताल
 
अस्पतालों को अमेरिका की बड़ी कंपनी ऑक्सीजन उपलब्ध कराती है, इसलिए उसकी गुणवत्ता में कोई संदेह नहीं किया जा सकता है. सेंट्रल ड्रग कंट्रोल से ये कंपनियां अनुमति प्राप्त हैं.
– योगेश गंभीर, राज अस्पताल

ऑक्सीजन प्लांट के लिए औषधि विभाग के पास आवेदन भेजा गया है. इसके लिए क्या गाइड लाइन मांगी थी, पर जवाब नहीं आया है. वर्तमान में एक एजेंसी से ऑक्सीजन ली जाती है. शुद्धता के बारे में वही जिम्मेदार है.

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