अनुज कुमार सिन्हा की कलम से : सही समय पर महेंद्र सिंह धौनी ने लिया सही फैसला

2017_1largeimg06_jan_2017_133421750-1अब आप यह नहीं कह सकते कि टीम इंडिया (वनडे, टी-20) का कप्तान अपने झारखंड का धाैनी है. अब आप मैदान में धाैनी काे बल्लेबाजी करते ताे देखेंगे, विकेट के पीछे कमाल दिखाते ताे देखेंगे लेकिन टॉस करने जाते नहीं, खिलाड़ियाें काे निर्देश देते हुए नहीं, गेंदबाजाें काे बुला कर गेंद थमाते हुए नहीं. ऐसा इसलिए क्याेंकि धाैनी ने वनडे आैर टी-20 की भी कप्तानी स्वयं छाेड़ दी है. बड़ी घाेषणा है, अप्रत्याशित है आैर क्रिकेटप्रेमियाें के लिए चाैंकानेवाला है. धाैनी के काम करने का तरीका भी यही है. किस समय क्या फैसला लेंगे, काेई नहीं बता सकता. सिर्फ धाैनी ही बता सकते हैं. 

याद रखिए, धाैनी ने कप्तानी छाेड़ने का फैसला किया है, क्रिकेट छाेड़ने का नहीं. वे टीम इंडिया में रहेंगे, वनडे आैर टी-20 मैच खेलते रहेंगे. जिस समय धाैनी ने यह फैसला लिया, उस दिन उनके साथ झारखंड के रणजी के सभी खिलाड़ी थे. सभी अवाक थे क्याेंकि उनके धाैनी भैया ने कैसे इतना कड़ा फैसला ले लिया. धाैनी के चेहरे पर काेई शिकन नहीं थी. वही आत्मविश्वास. वही भराेसा, तभी ताे झारखंड के सेमीफाइनल में हार जाने के बावजूद नाराज हाेने की जगह उन्हाेंने अपने छाेटे भाइयाें के लिए पार्टी दी थी. काेई आैर खिलाड़ी हाेता ताे रणजी मैच में खराब बल्लेबाजी करनेवालाें काे चार बात सुनाता, पार्टी ताे कतई नहीं देता. धाैनी अलग हैं. अपने राज्य झारखंड के खिलाड़ियाें का मनाेबल बढ़ाने के लिए नागपुर में उनके साथ रहे, गाइड करते रहे. किसी ने खराब खेला ताे भी कुछ नहीं बाेला. ऐसे धाैनी काे काैन खिलाड़ी अपना नहीं मानेगा, ऐसे खिलाड़ी द्वारा कप्तानी छाेड़ने पर काैन दुखी नहीं हाेगा.

कप्तानी छाेड़ने के बावजूद उनके समर्थकाें काे इस बात का संताेष है कि मैदान पर उन्हें खेलते हुए ताे देखेंगे. ऐसे धाैनी शांत कप्तान माने जाते रहे हैं, जाे बड़े से बड़े दबाव काे भी आसानी से झेलने में माहिर रहे हैं. अब धाैनी जब मैदान में उतरेंगे, ताे उन पर कप्तानी का थाेड़ा सा भी दबाव नहीं रहेगा, वे अपना स्वाभाविक खेल आैर बेहतर तरीके से खेल सकते हैं. इससे धाैनी का क्रिकेट जीवन आैर लंबा चलेगा (अगर बीच में धाैनी फिर काेई अप्रत्याशित फैसला कर संन्यास लेने की घाेषणा कर दें ताे बात अलग है). धाैनी अलग खिलाड़ी हैं. जब कप्तान बने ताे उनके खेल में आैर निखार आ गया.

जिन 84 वनडे में वे कप्तान नहीं थे, उसमें 44.23 रन की आैसत से (तीन शतक) रन बनाये लेकिन जब कप्तान बन गये ताे यह आैसत बढ़ कर 53.92 हाे गया. बड़े खिलाड़ियाें की यही पहचान हाेती है. हर खिलाड़ी कप्तान के भार काे झेल नहीं सकता है, तभी ताे सचिन तेंदुलकर जैसा महान खिलाड़ी कप्तान में नहीं चल सका, उन्हें कप्तानी छाेड़नी पड़ी थी. पद छाेड़ना आसान नहीं हाेता. कप्तानी छाेड़ने का फैसला कर धाैनी ने बड़प्पन भी दिखाया है. इससे यह संदेश भी गया है कि धाैनी अगला वर्ल्ड कप या टी-20 वर्ल्ड कप के लिए विराट काेहली काे अधिक से अधिक समय देना चाहते हैं. 

अब विराट काेहली के पास पर्याप्त समय है. काेहली काे भी अब आसानी हाेगी क्याेंकि वे तीनाें फार्मेट (टेस्ट, वनडे, टी-20) के खिलाड़ी हैं. टेस्ट में कप्तान आैर बाकी में सामान्य खिलाड़ी के ताैर पर खेलने से किसी भी खिलाड़ी (विराट भी उनमें से एक हैं) के लिए असहज स्थिति बन जाती है. अब कम से कम ऐसा नहीं हाेगा. विराट भी महान खिलाड़ी हैं आैर धाैनी जब क्रिकेट का बैटन (कप्तानी) विराट काे साैंप रहे हैं ताे उन्हें इस बात की संतुष्टि हाेगी कि जिस भारतीय टीम काे उन्हाेंने ऊंचाइयाें पर पहुंचाया है, वह किसी सुरक्षित हाथ में जा रहा है.

धाैनी भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानाें में एक रहे हैं. बताैर कप्तान 199 वनडे मैच खेला है. इन 199 में से 110 मैच जीता है. उसके बाद ही अजहर (90 जीत), साैरभ गांगुली (76 जीत), द्रविड़ (42 जीत) आैर कपिलदेव (39 जीत) का स्थान आता है. धाैनी ने भारतीय क्रिकेट काे बहुत कुछ दिया है आैर बहुत कुछ देना बाकी है. एक कप्तान के ताैर पर वन डे वर्ल्ड कप आैर टी-2- वर्ल्ड कप के साथ-साथ चैंपियंस ट्राफी चैंपियन बनाया. 

अब एक खिलाड़ी के ताैर पर आगे भी जलवा दिखाना है. दाे साल पहले उन्हाेंने अचानक टेस्ट से संन्यास लेने की घाेषणा कर दी थी. इस बार का फैसला थाेड़ा अलग है. कप्तान नहीं रहेंगे लेकिन एक खिलाड़ी के ताैर पर टीम में रहेंगे. यह सही है कि भारतीय क्रिकेट काे अभी एक खिलाड़ी के ताैर पर धाैनी की बहुत जरूरत है. देश में काेई ऐसा विकेटकीपर बल्लेबाज नहीं दिखता, जाे धाैनी की कमी काे भर पाये. अब धाैनी की जिम्मेवारी है कि दाे-तीन साल के भीतर वे अपना एक विकल्प तैयार करें. (झारखंड के विकेटकीपर बल्लेबाज इशान में यह संभावना कुछ हद तक दिखती है).

किसी भी खिलाड़ी का एक सपना हाेता है. वह है सम्मानजनक तरीके से विदाई. देश में अधिकांश ऐसे खिलाड़ी-कप्तान हुए हैं जिन्हें जबरन इस पद से हटाया गया है. धाैनी ने स्वत: अपना पद छाेड़ा है. किसी ने हटाया नहीं है. अगर आगे भी धाैनी कप्तान बने रहना चाहते ताे शायद काेई बाेल भी नहीं पाता. लेकिन धाैनी ने ऐसा नहीं किया. यही फर्क है धाैनी आैर अन्य खिलाड़ियाें में. अभी धाैनी शिखर पर हैं. दुनिया के बेस्ट फिनिशर माने जाते हैं. ऐसे माैके पर कप्तानी छाेड़ने के कारण धाैनी का कद आैर बढ़ गया. अब धाैनी का नया काम हाेगा-आैर खुल कर अपना खेल खेलना. नये लीडर (यहां कप्तान) काे अपने साथ खेलाते हुए कप्तानी के गुण सिखाना भी उनका काम है. 

विराट में भी बहुत गुण हैं लेकिन धैर्य-संयम की कमी उनमें है. यह गुण उन्हें अभी सिखना है आैर धाैनी से बेहतर काेई यह काम नहीं कर सकता. अब यह विराट काेहली (जिन्हें नया कप्तान चुनना तय है) पर यह निर्भर करता है कि इस महान खिलाड़ी काे टीम में रख कर उनके गुण, अनुभव का कितना फायदा वे ले सकते हैं. धाैनी ने अपनी कप्तानी में छाेटी-छाेटी जगहाें से आये नये-नये खिलाड़ियाें पर भराेसा किया, माैका दिया, नये खिलाड़ियाें काे खाेजा. आज वे खिलाड़ी टीम इंडिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं.

धाैनी से बहुत साेच कर सही समय पर सही फैसला लिया है. हर खिलाड़ी के अच्छे आैर बुरे दिन आते हैं. अगर काेई खिलाड़ी शिखर पर रहते त्याग (कप्तानी छाेड़ना या संन्यास लेना) करता है ताे दुनिया उसे याद करती है. धाैनी अपनी ताकत काे बखूबी पहचानते हैं.

जिस दिन उन्हें लगेगा कि अब उन्हें आैर क्रिकेट नहीं खेलनी है ताे एक सेकेंड विलंब किये बिना वे अलविदा कहने से नहीं चूकेंगे. धाैनी जिस तरह के खिलाड़ी हैं, भविष्य में भी वे किसी काे (चयनकर्ता काे) यह कहने का माैका नहीं देंगे कि धाैनी बाेझ बन रहे हैं. 

ऐसी स्थिति शायद कभी नहीं आयेगी. शान से टेस्ट काे अलविदा कहा, शान से वनडे, टी-2- की कप्तानी छाेड़ी. जब समय आयेगा (अभी दिल्ली दूर है) ताे शान से क्रिकेट काे अलविदा कहेंगे. अभी धाैनी फिट हैं आैर उनमें बहुत क्रिकेट बाकी है. हां, कप्तान के ताैर पर वे जाे चाैंकानेवाला फैसले लेते थे, वह कमी खलेगी. इन्हीं फैसलाें में एक है-पहले टी-20 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम आेवर में जाेगिंदर शर्मा से गेंदबाजी करवा कर विकेट लेना आैर चैंपियन बनना.

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