द्वितीय विश्व युद्ध की खबर ब्रेक करने वाली पत्रकार का 105 साल में निधन

हांग कांग। ब्रिटिश वॉर जर्नलिस्ट (युद्ध पत्रकार) क्लेयर हॉलिंगवर्थ की 105 साल की उम्र में हांग कांग में निधन हो गया। पोलैंड पर नाजी आक्रमण की खबर पहली बार उन्होंने ही ब्रेक की थी, जो द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत थी। उन्होंने वियतनाम, अल्जीरिया और मिडिल ईस्ट के युद्धों को भी कवर किया था।

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क्‍लेयर ने 27 साल की उम्र में लंदन के अखबार डेली टेलीग्राफ में पत्रकार की नौकरी शुरू की थी। इसके बाद अगस्‍त 1939 में द्वितीय विश्‍व युद्ध शुरू हो गया था। उन्‍होंने टेलीग्राफ के वारसॉ करेस्‍पॉडेंट को कॉल करके यह जानकारी दी कि दक्षिणी पोलैंड में नाजी सैनिकों ने हमला कर दिया है। पोलैंड पर हमले की खबर को कवर करते हुए क्लेयर को कई बार रात में कार में ही सोना पड़ता था।

पिछले साल अक्‍टूबर में उन्‍होंने अपना 105वां जन्‍मदिन मनाया था।

क्‍लेयर में नाजी सैनिकों द्वारा पोलैंड पर हमला किए जाने से कई दिनों पहले ही इस घटना का अंदाजा लगा लिया था। उस समय वो ब्रिटिश काउंसलेट की कार लेकर जर्मनी द्वारा कब्‍जा किए गए इलाके में पहुंच गई थी। वहां उन्‍होंने भारी मात्रा में आर्मर्ड कार, आर्टिलरी और युद्धक टैंक देखे। डिप्‍लोमैटिक कार होने की वजह से वो ऐसा कर सकीं थी। उनकी यह खबर भी बड़ी ब्रेकिंग साबित हुई थी।

पोलैंड लौटकर उन्‍होंने खबर लिखी, लेकिन उसे अपने नाम से प्रकाशित (बायलाइन) नहीं किया था।

अपने पेशेगत जीवन के दौरान कई बार मौत का सामना कर चुकीं क्‍लेयर ने वॉर रिपोर्टिंग को अपना जुनून बना लिया था। पिछले 30 वर्षों से वो हांगकांग में रह रही थीं। उन्‍हें ब्रिटिश जर्नलिज्‍म में लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए अवॉर्ड व्‍हाट द पेपर्स से अवॉर्ड से पुरस्‍कृत किया गया था। यह अवॉर्ड ब्रिटेन की महारानी क्‍वीन एलिजाबेथ द्वितीय के हाथों दिया गया था।

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टेड हीथ और हांग कांग के पूर्व गवर्नर क्रिस पैटर्न भी क्लेयर हॉलिंगवर्थ के प्रशंसक थे।

क्लेयर हॉलिंगवर्थ का जन्‍म 10 अक्‍टूबर 1911 को इंग्‍लैंड के लिसेस्‍टर में नाइटन गांव में हुआ था। मध्‍यम वर्गीय परिवार से आने वाली क्‍येलर के पिता की बूट फैक्‍टरी थी। उन्‍होंने क्रोएशिया की जैगरेब यूनिवर्सिटी तथा लंदन की स्‍लावोनिक स्‍टडीज़ से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने दो बार शादी की और 1981 के दशक से हांगकांग में रह रही थीं।

वृद्धावस्‍था में भी उन्‍होंने अपने पत्रकारिता के जुनून को कम नहीं होने दिया था। मुख्‍य धारा की रिपोर्टिंग को अलविदा कहने के बाद वो इंटरनेशनल हेराल्‍ड ट्रिब्‍यून और एशियन वॉल स्‍ट्रीट जर्नल के लिए कई वर्षों तक लिखती थीं।

 

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