दक्षिण चीन सागर पर चीन को अमेरिका का स्पष्ट संकेत, खाली करें अपने द्वीप

12_01_2017-rextillersonवॉशिंगटन (पीटीआई)। अमेरिका चीन को यह स्पष्ट संकेत देगा कि उसे दक्षिण चीन सागर पर अपने कृत्रिम द्वीपों को खाली कर देना चाहिए। अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेश मंत्री पद के लिए नामित रेक्स टिलरसन ने विवादित जलक्षेत्र में चीन की द्वारा की जा रही गतिविधियों पर हमला करते हुए यह चेतावनी दी।

बुधवार को अपने नामांकन संबंधी सुनवाई के लिए सीनेट की विदेशी मामलों की समिति के सामने पेश हुए 64 साल के रेक्स ने कहा, “पहले हम चीन को इस बात का स्पष्ट संकेत भेजने जा रहे हैं कि वह द्वीप निर्माण बंद कर दे और दूसरा यह कि उन द्वीपों में आपके (चीन) दखल की इजाजत नहीं है।”

एक सवाल के जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में चीन की गतिविधियां चिंतनीय हैं और मुझे फिर यही लगता है कि इस पर प्रतिक्रिया नहीं दिए जाने से वह इस दिशा में आगे बढ़ता जाएगा।” उन्होंने कहा कि विवादित जलक्षेत्र में चीन की द्वीप निर्माण की गतिविधियां और पूर्वी चीन सागर में जापान नियंत्रित सेनकाकू द्वीपों के उपर चीन द्वारा हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र की घोषणा “गैरकानूनी गतिविधियां” हैं।

उन्होंने कहा, “चीन उस क्षेत्र को अपने अधिकार में ले रहा है या नियंत्रण पाने की घोषणा कर रहा है जो कायदे से उसका है ही नहीं। चीन द्वारा द्वीप निर्माण करनाऔर उन पर सैन्य संसाधनों को स्थापित करना वैसा ही है जैसा रूस ने क्रीमिया पर अधिकार जमाया था।”

टिलरसन ने कहा, “अगर चीन को इस जलक्षेत्र से आवागमन के नियम कायदों का किसी भी रूप में निर्धारण करने दिया जाता है तो इससे पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा उत्पन्न होगा। यह वैश्विक मुद्दा कई देशों के लिए, हमारे महत्वपूर्ण सहयोगियों के लिए बेहद जरूरी है।”

चीन को स्पष्ट संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिका, चीन के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाने वाला है। उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से जिस भाग में हम चीन के साथ संघर्ष कर रहे हैं, वहां हमारे गहरे आर्थिक संबंध हैं। इसके माध्यम से (दक्षिण चीन सागर) से प्रतिदिन 5 खरब डॉलर का व्यापार किया जाता है। हमारी अर्थव्यवस्थाएं बाधित की जा रही हैं। लेकिन हम इसका जवाब देंगे और चीन की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। “

आपको बता दें कि चीन प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा ठोकता है। जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान इसका विरोध करते हैं। पिछले वर्ष ही अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल द्वारा चीन के दक्षिण चीन सागर पर दावे को खारिज कर दिया गया था।

 

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